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Birthday of lord Ram – Happy Ramnavmi ! शुभ रामनवमी !!

श्री रामचन्द्र कृपालु भज
मन हरण भवभय दारुणाम
नवकंज लोचन, कंज मुख,
कर कंज, पद कंजारुणम
राम नवमी की हार्दिक बधाई!!!!!

 

Let Us Pray Sacred Mantras,
In The Praise Of Eternal Savior
Om Sri Ram Jai Ram Jai Jai Ram.
Wish You Be Accompanied With
Auspiciousness And
Blessings of Rama Navami.

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Devi Mantra

“Sarva Mangala Mangalye Sive Sarvartha Sadhike
Saranye Trayambike Gauri Narayani Namostute”

In Sanskrit:

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

Meaning : ‘She is the most auspicious one and the one who bestows auspiciousness upon all of the world. She is pure and holy. She protects those who surrender to her and is also called the Mother of the three worlds and is Gauri, daughter of mountain king. We bow down to Mother Durga again and again. We worship her.’

Benefit : This mantra is recited almost during all celebrations, rituals and events. Regular chanting can give wisdom and strength combined with a prosperous life.

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Religion and spirituality

Religion

I believe religion gives us an art of living  and initiates our journey towards spiritualism. Our first brush with our own religion is just like going to schooling and learning many basic things. 

Religion has a strong impact of the life of people, so its easy to teach them right-wrong or good-bad with the help of religion. I am obviously talking purely about religion on its own, not the  hypocritical, political, divisive ways in which it is often used.

 

spirituality

Spirituality is deep wisdom (inner voice / inner wisdom)  and might be like getting higher education. Spirituality enables us to respect all religions and all living beings. It provides the wisdom to work for a greater cause and to understand that all religions are path directed to the same universal power. 

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Shanti / Peace Mantra.

      It is believed that by chanting this mantra, we move from our personal self and radiate a prayer of love for the world around us. This Sanskrit mantra  is from one of the Mangala  (auspicious) Mantra often recited after a pooja, yoga or religious ceremony.

 

स्वस्तिप्रजाभ्यः परिपालयंतां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः ।

गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनोभवंतु ॥

ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः |

svasti-prajā-bhyaḥ pari-pāla-yaṁtāṁ nyāyena mārgeṇa mahīṁ mahīśāḥ |

go-brāhmaṇebhyaḥ śubham-astu nityaṁ lokāḥ samastāḥ sukhino-bhavaṁtu ||

auṁ śāntiḥ śāntiḥ śāntiḥ |

“May all beings everywhere be happy and free, and may the thoughts, words, and actions of my own life contribute in some way to that happiness and to that freedom for all.”

Om peace, peace, peace

 

 

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शुभ जन्माष्टमी Happy birthday lord Krishna

 

lord krishna – greatest counsellor of the universe

The Mahabharata was a dynastic succession struggle between two groups of cousins – Kauravas and Pandavas, for the throne. Pandava Arjuna was confused in the war field. All the enemies were his own relatives, friends and family . He asked Krishna for divine advice. Krishna, advised him of his duty. After a long counselling session Krishna convinced Arjun . This was a war of good on the evil

This counselling of Krishna is known as Gita/ Bhagvat Gita, most religious, philosophical and holy scripture of the Hindu religion .

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ २-४७

Karmanye vadhikaraste Ma Phaleshu Kadachana,
Ma Karmaphalaheturbhurma Te Sangostvakarmani

(You have the right to work only but never to its fruits. Let not the fruits of action be your motive, nor let your attachment be to inaction. )

श्री कृष्ण -ब्रह्मांड के सबसे बड़े मनोवैज्ञानिक काउंसिलर

महाभारत दो भाईयों के परिवार में राज्य प्राप्ति का य़ुद्ध था। भारत का यह महा य़ुद्ध महाभारत कहलाया। अपने परिवार के विरुद्ध य़ुद्ध लङने से सशंकित अर्जुन को भगवान कृष्ण ने मात्र कर्म करने का लंबा उपदेश / परामर्श दिया। अच्छा की बुराई पर जीत का ज्ञान दे कर कृष्ण ने अर्जुन को य़ुद्ध के लिये राजी किया।कृष्ण द्वारा अर्जुन का यह मनोवैज्ञानिक काउंसिल /उपदेश भागवत गीता कहलाई।

 

Source: शुभ जन्माष्टमी Happy birthday lord Krishna

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Someshwar Wadi temple Pune सावन में सोमेश्वर महादेव 

Beautiful Heritage  Swayambhu  Someshwar temple of Pune was  built with black stone  in  1640 by Shivaji for his mother Jijabai.

पुणे के इस सुंदर विरासत  स्वयंभू ( स्वंय भुमि से निकला शिवलिंग)  सोमेश्वर मंदिर  को 1640 में शिवाजी ने काले पत्थरों से,  अपनी मां जिजाबाई के लिए बनाया था। वह वहाँ नियमित रुप से पूजा करने आती थीं।

 :

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
Om Try-Ambakam Yajaamahe
Sugandhim Pusstti-Vardhanam
Urvaarukam-Iva Bandhanaan
Mrtyor-Mukssiiya Maa-[A]mrtaat ||

– from Rig Veda 7.59.12

Meaning:
1: Om, We Worship the Three-Eyed One (Lord Shiva),
2: Who is Fragrant (Spiritual Essence) and Who Nourishes all beings.
3: May He severe our Bondage of Samsara (Worldly Life), like a Cucumber (severed from the bondage of its Creeper), …
4: … and thus Liberate us from the Fear of Death, by making us realize that we are never separated from our Immortal Nature.

 

मंदिर का मुख्य द्वार main entrance of the temple

                                                                        गर्भ गृह द्वार

 

काले पाषाण का शिवलिंग और खूबसूरत श्वेत फर्श

 

रुद्र का अभिषेक –  

 

 

 

 

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महाकालेश्वर उज्जैन (ज्योतिर्लिंग 3 )

तीसरा ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर है। यह क्षिप्रा नदी के किनारे, मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित है। प्राचीन ग्रन्थों में उज्जैन को उज्जयिनी तथा अवन्तिकापुरी के नाम से भी जाना जाता है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग रुद्रसागर ताल के बगल में स्थित है। उज्जैन में प्रत्येक बारह वर्ष पर महाकुम्भ का आयोजन होता है। भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर महादेव को अत्यन्त सिद्ध और तांत्रिक महत्व का माना जाता है।

इस ज्योतितिर्लिंग की एक और विशेषत है।यहाँ प्रात:काल की पूजा में अनिवार्य रूप से सवा मन श्मशान के चिता भस्म द्वारा अभिषेक किया जाता है। इस भस्म आरती में सम्मिलित होना पुण्यदायी माना जाता है। इसके लिए विशेष टिकट की व्यवस्था है।

पौराणिक कथा

1 शिव पुराणनानुसार, भगवान ब्रह्मा और विष्णु में कौन श्रेष्ठ है, यह जानने के लिए उज्जैन में शिव जी ने विशाल ज्योति का अंतहीन स्तंभ बना दिया और भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा को दो दिशाओं में प्रकाश के अंत को खोजने के लिए भेजा। विष्णु ने हार स्वीकार कर ली पर ब्रह्मा ने झूठ बोल दिया। शिव ने नाराज़ ब्रह्माजी को को शाप दिया कि पूजा विधानों में उनका स्थान नहीं रहेगा।। ऐसी मान्यता है कि शिव द्वारा स्थापित ज्योती स्तंभ स्थान पर उज्जैन में ज्योतिर्लिंग स्थापित है।

2 दूसरी किवदंती एक शिव भक्त ब्राह्मण और उसके चार पुत्रों के बारे में है। जो इस स्थान पर सर्वदा पिनाकी या शिव के पार्थिव लिंग की पूजा करते थे। शिव ने साक्षात प्रकट हो कर दूषण नामक असुर से इस परिवार की रक्षा की। उन्हें महाकाल शिव ने हमेशा अपने वहाँ विराजमान होने का वर दिया। इस प्रकार यह भगवान शिव की स्थली बन गई और भगवान शिव महाकालेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

3 तीसरी कथानुसार, उज्जयिनी नगरी में महान शिवभक्त चन्द्रसेन नामक एक राजा थे। शिवजी के पार्षद, मणिभद्र जी उन्हें महामणि कौस्तुभ मणि प्रदान किया। सूर्य के समान देदीप्यमान, मंगल प्रदान करनेवाली मणी को पाने के लालच में सभी पड़ोसी राजाओं ने उज्जयिनी पर हमला कर दिया। पर उज्जयिनी के एक छोटे से बालक में भी शिव भक्ती की गहराई देख उन्होने शत्रुता त्याग मित्रता कर लिया। भगवान महेश्वर की कृपा पाने के लिए उन्होंने भी वहाँ महाकालेश्वर का पूजन किया।

मान्यता है कि, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन करने से स्वप्न में भी किसी प्रकार का दुःख अथवा संकट नहीं आता है। जो कोई भी मनुष्य सच्चे मन से महाकालेश्वर लिंग की उपासना करता है, उसकी सारी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं और वह परलोक में मोक्षपद को प्राप्त करता है-

महाकालेश्वरो नाम शिवः ख्यातश्च भूतले।
तं दुष्ट्वा न भवेत् स्वप्ने किंचिददुःखमपि द्विजाः।।
यं यं काममपेदयैव तल्लिगं भजते तु यः ।
तं तं काममवाप्नेति लभेन्मोक्षं परत्र च।।

ज्योतिर्लिंग – पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रगट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। हिंदु मान्यतानुसार इनके दर्शन, पूजन या प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेने मात्र से सात जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।
शिव पुराण – शिव पुराण, कोटि ‘रुद्रसंहिता’ में इस प्रकार बारह ज्योतिर्लिंगों की चर्चा है, जिसमें सोमनाथ का वर्णन प्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में किया गया है।

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं परमेश्वरम्।।
केदारं हिमवत्पृष्ठे डाकियां भीमशंकरम्।
वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे।।
वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारूकावने।
सेतूबन्धे च रामेशं घुश्मेशंच शिवालये।।
द्वादशैतानि नामानि प्रातरूत्थाय यः पठेत्।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति।।
यं यं काममपेक्ष्यैव पठिष्यन्ति नरोत्तमाः।
तस्य तस्य फलप्राप्तिर्भविष्यति न संशयः।।

अर्थात – सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर, परली में वैद्यनाथ, डाकिनी नामक स्थान में श्रीभीमशङ्कर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल और संध्या के समय इन बारह ज्योतिर्लिङ्गों का नाम लेता है, उसके सात जन्मों का किया हुआ पाप इन लिंगों के स्मरण मात्र से मिट जाता है।