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मैं – कविता Self- Poetry

 

You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.

                                                          Swami Vivekananda

  जीवन की  परिपूर्णता —-

अगर यह लौकिक हो  – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,

या  संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।

तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।

क्या  खोजता  है यह ?

क्या खींचती  है  इसे अपनी अोर?

यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?

शायद अपने आप को   ढूँढ़ने  

मैं कौन हूँ??

                                                                              या

मैं से दूर  ?

 

Image from internet.

 

 

 

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सुनहरी सुबह और रुपहली शाम – कविता

एक आदत सी थी,

बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।

सुनहरी सुबह और  रुपहली  शाम की ,

खूबसूरती में ङूब जाने की। 

पर ज़माने  ने  इसमें भी  कमियां निकाल दी।

तब ख्याल आया, 

अब तो 

खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।

 हाथ जुङ गये  इबादत में।

When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi