Pakistani blogger and journalist known for criticising army hacked to death

एक नौजवान लेखक के कलम में ऐसी

क्या ताक़त थी कि कुछ लोगों

में इतना डर भर गया ?

क्यों कहते हैं कलम आज़ाद होती है .

यह दुर्घटना है या लिखने की सज़ा?

https://www.thehindu.com/

https://www.google.co.in/amp/s/www.thehindu.com/news/international/pakistani-blogger-and-journalist-known-for-criticising-army-hacked-to-death/article27994750.ece/amp/

Minor’s eyes gouged out, hands crushed over Rs 5,000-loan dispute in Aligarh

बर्बरता और क्रूरता की इंतिहा हो गई .

किसी की आँखों का मोल नहीं है

किसी के जीवन का मूल्य नहीं .

मासूमियत भी नज़र नहीं आई .

है अनमोल सिर्फ़ अपनी दुश्मनी, 5 हज़ार

रुपये और अपनी हैवानियत !!!

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/crime/story/crime-uttar-pradesh-aligarh-minor-girl-brutal-murder-1543753-2019-06-06

11,000 kg garbage, four dead bodies removed from Mt Everest in two-month long cleanliness drive

पृथ्वी को हमने डस्टबीन बना दिया ,

दिल नहीं भरा है तब सागर की ओर मुड़ गए .

फिर भी तसल्ली नहीं हुई तो

एवरेस्ट का भी यह हाल कर दिया .

हद है स्वार्थ परस्ता और नासमझी की.

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/world/story/11-000-kg-garbage-four-dead-bodies-removed-from-mt-everest-in-two-month-long-cleanliness-drive-1543470-2019-06-06

Assam Police finds 590kg ganja, wins Internet with crazy tweet: Don’t panic, we found it

 

 

 

यह भी ख़ूब रही !!!

असम पुलिस की दिल्लगी की

यह अदा भी लाजवाब रही.

इस “खोया पाया” ख़बर को पाकर

अपराधी ‘कभी खुशी कभी ग़म’

मना रहे होंगे, या बिलों में छुपे होंगे?

इस इनोवेटिव , मज़ेदार विचार के लिए

असम पुलिस को सलाम !!!!

https://www.google.co.in/amp/s/www.indiatoday.in/amp/trending-news/story/-assam-police-finds-590kg-ganja-wins-internet-with-crazy-tweet-don-t-panic-we-found-it-1543079-2019-06-05

आँसू

इन आँसुओं से एक  बात पूछनी है।

इतना नमक कहाँ से ढूँढ लाते हो?

कहाँ से बार बार चले आते हो?

रुक क्यों नहीं जाते ?

बातें क्यों नहीं सुनते  ?

जब देखो आँखें धुँधली कर जाते हो।

Hospital staffers didn’t respond to her cries. Woman delivers her own baby

मातृत्व के मर्मांतक और

असहनीय कष्ट को

रात्रि के नीरवता में

अकेले सहना क्या सरल है?

उस माँ के साहस और

हौसले को सलाम है।

क्या हम पाषाण युग में रहते हैं?

या लोगों के दिल पाषाण …

पत्थर …. के हो चुके हैं?

https://m.hindustantimes.com/india-news/hospital-staffers-didn-t-respond-to-her-cries-woman-delivers-her-own-baby/story-tyCjCxeWBsWV1wvt3WoYTI.html?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts

ज़िंदगी के रंग -160

इंसान की फ़ितरत होती है ,

मधुर यादों और

सुहानी कल्पनाओं में जीने की.

अपने अतीत की यादों

और भविष्य की संभावनाओं में

अपने को सीमित न करें .