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सदाबहार शरद सप्तपर्णी – कविता

सप्तपर्णी / एल्स्टोनिया स्कोलरिस – Apocynaceae / Alstonia scholaris

‘यक्षिणी  वृक्ष’  कहलाने वाला सप्तपर्णी   वृक्ष के नीचे कविन्द्र  रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘गीतांजलि’ के कुछ अंश  लिखे थे।   शांति निकेतन में  दीक्षांत समारोह में छात्रों को सप्तपर्णी के गुच्छे देने का प्रचलन हैं।  थरवडा बौद्ध धर्म  में भी इस  वृक्ष  की पत्तियों के  इस्तेमाल की बात   है। ये फूल  मंदिरों और पूजा में भी काम आता है , हालाकि इसके पराग से कुछ लोगों को  एलर्जी भी होती है।आयुर्वेद व आदिवासी लोग प्राकृतिक उपचार में इस पेड़ की छाल, पत्तियों आदि को अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाते हैं।

बिन बुलाये घुस  आई रातों में अपनी खुशबू लिये ,

यक्षिणी  वृक्ष के फूलों की मादक सम्मोहक सुगंध। 

      अौर

कस्तूरी मृग की तरह, खुशबू की खोज खींच लाई,

चक्राकार  सात पत्तियो के बीच  खिले 

सप्तपर्णी  के सदाबहार फूलों के पास।

जिसकी सुरभी शामिल है,

रवींद्रनाथ ठाकुर ने  ‘गीतांजलि’ में भी ।

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प्रश्न में हीं उत्तर – कविता

Are we really aware of how much we know? While Writing and teaching  one can examine or validate his/her knowledge.  Reading, Writing and Teaching may help you find an answer of this question.

 

जब कुछ लिखने बैठती हूँ, तब समझ आता है,

कितना कम जानती हूँ।

जब  पढ़ाना होता है, तब  भी समझ आता है,

कितना कम जानती हूँ।

अपने ज्ञान को मापने का है क्या कोई तरीका?

कि

हम क्या जानते हैं? अौर कितना जानते हैं?

प्रश्न में हीं उत्तर छुपा है…….. 

लिखना, पढ़ना अौर  पढ़ाना हीं

ज्ञान को आत्मसात  अौर अभिव्यक्त करने का  सबसे आसान तरीका है,

अौर अपने को परखने का तरीका भी लेखन और शिक्षण  हीं है!!!!!

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आर्कटिक बीज वॉल्ट “Doomsday Seed Vault” in the Arctic

On a desolate Arctic island, off the coast of Norway is the Svalbard Global Seed Vault, a repository with the capacity to hold up to 2.25 billion seeds in the event of a “doomsday” catastrophe.

 

क्या आप जानते हैं कि दुनिया में ऐसे शोध अौर काम भी चल रहें हैं?    जिसे  डूम्सडे  (प्रलय का दिन ) बीज वॉल्ट कहा जाता है?

स्वालबार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट  नॉर्वेजियन द्वीप पर एक सुरक्षित बीज बैंक है।  स्वाल्बार्ड ग्लोबल बीज वॉल्ट का मिशन पारंपरिक जीनबैंक  को आकस्मिक नुकसान से सुरक्षा  देने के लिये बनाया गया। यह  वैश्विक खाद्य फसलों के बीज को युद्ध या प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिये बनाया गया है। यहाँ दुनिया भर से बीज संग्रह किये गये हैं।

इस की शुरुआत नॉर्डिक जीन बैंक  ने 1 9 84 से, एक खाली कोयले की खदान में  बीजों को शुन्य से नीचे तापमान पर जमा कर  संग्रहित करे से हुआ।  बाद में बीज बैंक  स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट, निर्माण किया गया । जो बर्फीले आर्कटिक क्षेत्र के  एक  पर्वत के अंदर बना  है,  और मजबूत सुरक्षा प्रणालियों से लैस है। बीजों के कमरे को  -18 डिग्री सेल्सियस (-0.4 डिग्री फारेनहाइट) पर रखा जाता है। कम तापमान और सीमित ऑक्सीजन बीजों  को सुरक्षित रखते हैं।

 

 

 

 

The Hindu

Global Research

 

Image courtesy“Doomsday Seed Vault” ,  Arctic project.

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ज़िन्दगानी – कविता 

Wherever you are, and in whatever circumstances, strive to love and to be a lover.
~ Rumi

जीवन रुकता नहीँ 

  हर पल , हर क्षण  नया है 

दरिया के बहते पानी की तरह.

जो बह गया वह बीत गया.

वह पानी लौट कर आता नहीँ.

यह जीवन चक्र चलता रहता है.

हर पल कुछ नया ले कर आता है.

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सबक- कविता

जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।

किसी को परेशानियों में,

सलाह जरुर देनी चाहिये।

पर बिन माँगे  मदद के लिये,

हाथ भी बढ़ाना  देना चाहिये।

इसमें खतरा तो हैं,

पर

ना जाने कौन किस लम्हें  में,

किस  दौर से गुज़र रहा है?

जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।

Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife

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युद्ध अौर शांती War and Peace

While God waits for His temple to be built of love, men bring stones.
Rabindranath Tagore

क्या  युद्ध की भयावहता हम भूल गये हैं ,

अौर शांती का मोल भी।

सीमाअों में बँध कर,

हम सारी सीमाएँ पार कर गये हैं।

State of emergency in Yemen’s Sanaa over cholera crisis
More than 184 Yemenis have been killed by a cholera epidemic that is gripping the Houthi-controlled Sanaa.  News

Yemen crisis: Who is fighting whom? BBC News

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शब्दों का  चोला – कविता 

Don’t ask yourself what the world needs. Ask yourself what makes you come alive and then go do that. Because what the world needs is people who have come alive.
-Howard Thurman

कब क्या लिखती हूँ , 

मुझे भी नहीँ पता.

आजाद छोड़ दिया है

अपने मन और अंतरात्मा को.

यह दुनिया ही खट्टी मीठी झलकियाँ 

दिखलाती रहती है.

मै तो बस उन्हें  शब्दों का

चोला पहना देती हूँ.

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