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रामधारी सिंह ‘दिनकर’ , के जन्मदिन (२३ सितंबर ) पर

राष्ट्र कवि, पद्म विभूषण रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (२३ सितंबर १९०८-२४ अप्रैल१९७४) का जन्म सिमरिया, मुंगेर, बिहार में हुआ था । उन्होंने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की । उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था । उनकी अधिकतर रचनाएँ वीर रस से ओतप्रोत है ।

कुरूक्षेत्र – प्रथम सर्ग की चंद पंक्तियाँ

वह कौन रोता है वहाँ-

इतिहास के अध्याय पर,

जिसमें लिखा है, नौजवानों के लहु का मोल है

प्रत्यय किसी बूढे, कुटिल नीतिज्ञ के व्याहार का;

जिसका हृदय उतना मलिन जितना कि शीर्ष वलक्ष है;

जो आप तो लड़ता नहीं,

कटवा किशोरों को मगर,

आश्वस्त होकर सोचता,

शोणित बहा, लेकिन, गयी बच लाज सारे देश की ?

और तब सम्मान से जाते गिने

नाम उनके, देश-मुख की लालिमा

है बची जिनके लुटे सिन्दूर से;

देश की इज्जत बचाने के लिए

या चढा जिनने दिये निज लाल हैं ।

ईश जानें, देश का लज्जा विषय

तत्त्व है कोई कि केवल आवरण

उस हलाहल-सी कुटिल द्रोहाग्नि का

जो कि जलती आ रही चिरकाल से

स्वार्थ-लोलुप सभ्यता के अग्रणी

नायकों के पेट में जठराग्नि-सी ।

पहेली

आँसू और मुस्कान की पहेली पुरानी है.

ख़ुशी हो या ग़म

आँखे छलक हीं जातीं हैं.

ये मुस्कान भी फ़रेब है या सच

पहेली बन हीं जाती है .

उदास मुस्कान

उदास मुस्कान ,

एक नयन में आँसू

दूसरे में खिलती हँसी.

कौन सच , कौन मिथ्या ?

उदासी या हँसी ?

आँसुओं को आँखों हीं आँखों में पीती

आँखों की करुणा

या लबों की मुस्कान ?

जिंदगी के रंग -67

Topic by-

#IndiSpire240

What is inspiration? How different is it from hard-work, focus, involved approach, practice, and research? #Inspiration

The REKHA SAHAY Corner!

साँसे चले …समय गुजरता रहे बस …..

क्या यही है ज़िंदगी?

ना मक़सद …. ना ख़्वाब ……

हसीन तोहफ़ा है यह ज़िंदगी.

थोड़ी तमन्ना, अभिलाषा, लालसा

 लक्ष्य…. मकसद मिला कर 

गुनगुनाइये…..

राहें खुलती जायेंगीं।

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