दोस्त

किसी प्रिय मित्र ने लिखा –

साइलेंट मोड़ पर फ़ोन अच्छे लगते हैं ,

दोस्त नहीं .

पर क्या करें दोस्त ,

ज़िंदगी की डाउन्लोडिंग बीच में हीं अटक गई है .

वरना हम भी दोस्त थे काम के …..

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यादें फूल सी

काश कुछ यादों को

चुन कर याद रखने अौर कुछ को

भूल जाने का कोई तरीका होता।

पसंदीदा चुन लेते,

दर्द देने वाली यादों को मिटा देते ,

पर यह तो कुछ

फूल और कांटों जैसी साथ-साथ होती है

कुछ चुभती हैं

और कुछ खुशबू फैलाती है


मिर्जा गालिब (27 Dec 1796 – 15 Feb 1869)

मिर्ज़ा असद-उल्लाह बेग ख़ां उर्फ “ग़ालिब” (२७ दिसंबर १७९६ – १५ फरवरी १८६९) उर्दू एवं फ़ारसी भाषा के महान शायर थे।

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कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नज़र नहीं आती

मौत का एक दिन मु’अय्यन है
नींद क्यों रात भर नहीं आती

आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हँसी
अब किसी बात पर नहीं आती

जानता हूँ सवाब-ए-ता’अत-ओ-ज़हद
पर तबीयत इधर नहीं आती

है कुछ ऐसी ही बात जो चुप हूँ
वर्ना क्या बात कर नहीं आती

क्यों न चीख़ूँ कि याद करते हैं
मेरी आवाज़ गर नहीं आती

दाग़-ए-दिल नज़र नहीं आता
बू-ए-चारागर नहीं आती

हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती

मरते हैं आरज़ू में मरने की
मौत आती है पर नहीं आती

काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’
शर्म तुमको मगर नहीं आती।

meaning-  बर नहीं आती = पूरी नहीं होती), (सूरत = उपाय) (मुअय्यन = तय, निश्चित)

(सवाब = reward of good deeds in next life, ताअत = devotion,ज़हद = religious deeds or duties चारागर – doctor, healer.

40 jawans killed as explosive-laden car rams into CRPF convoy in Kashmir

अपने जान की क़ीमत दे कर

हमारे जान की सुरक्षा

के लिए मर मिटने वाले

देश के सपूत वीरों को

श्रद्धा सुमन !!!!

https://m.hindustantimes.com/india-news/feb-14-kashmir-blast/story-AoDEbZlMmvU6rHj6mwDDHO.html?utm_campaign=fullarticle&utm_medium=referral&utm_source=inshorts

रंग मनोविज्ञान

क्या आप कलर साइकोलॉजी/ रंगों की भाषा के बारे में जानते हैं?

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2000 में, ग्लासगो ने कुछ इलाकों में नीली स्ट्रीट लाइटिंग लगाने के बाद में इन क्षेत्रों में कम अपराध की की रिपोर्ट दर्ज की गई। इस रिपोर्ट को कई समाचार पत्रों ने छापा। जापान की एक रेल कंपनी ने अक्टूबर 2009 में आत्महत्या के प्रयासों को कम करने के लिये अपने स्टेशनों पर नीली बत्ती लगाई।

रंग मनोविज्ञान मानव व्यवहार के वैसे हीं प्रभावित करता है जैसे भोजन का स्वाद। रंग प्लेसबो के प्रभाव को भी बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, लाल या नारंगी दवा की गोलियां आमतौर ज्यादा असरकारक मानी जाती हैं। कौन रंग वास्तव में किसी व्यक्ति को कितना प्रभावित कर सकता है, यह अलग-अलग होते हैं। लिंग, आयु और संस्कृति जैसे कारक इसे प्रभावित कर सकते हैं । उदाहरण के लिए, एक अध्ययन में पुरुषों ने रिपोर्ट किया कि लाल पोशाक महिलाअों का आकर्षण बढ़ाता है, जबकि महिलाअों ने पुरुषों से प्रभावित होने में रंगों के असर से इनकार किया। मार्केटिंग और ब्रांडिंग में कलर साइकोलॉजी का भी व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

रंग मनोविज्ञान का सामान्य मॉडल छह सिद्धांतों पर निर्भर करता है:

सभी व्यक्ति के लिये हर रंग का एक विशिष्ट अर्थ होता है।

रंगों का यह अर्थ या तो सीखा या जैविक रूप/ जन्मजात होता है।

किसी रंग की पहचान व्यक्ति के विचार से स्वतः जुङ जाती है।

फिर व्यक्ति उस रंग से प्रेरित हो व्यवहार करता है।

व्यक्ति आमतौर पर आप से आप इससे प्रभावित होता है।

रंग, उसका अर्थ और प्रभाव परिस्थिती के अनुसार भी काम करना है।

courtesy – wikipedia  

Colours