जिंदगी के रंग – 98

चाँद चुराया

अरमानों को पूरा करने के लिए .

कई रातों की नींद अौर

साज़िश ख़्वाबों की

पूरी  नहीं होने दीं।

ज़ुबा बया करती रही अपने ज़ज़्बात।

पर……….

तेज़ बयार चली और अरमानों  का चाँद

छुप गया बादलों के आग़ोश में.

आवाज़ बिखर गई

टूटे काँच की किरचियों की तरह,

साथ हीं बिखर गए अरमानों के टुटे टुकड़े।