अनकहे अल्फ़ाज़

बोलतीं आँखे,

लरजते लब,

हथेलियाँ आपस में फँसी,

बेचैन अंगुलियाँ,

ज़मीन खुरचते पैर के अँगूठे,

बहुत कुछ कहते है …….

फिर भी अनकहे अल्फ़ाजों

को सुनना ज़रूरी क्यों है?