चेहरा

चेहरा क्या है?

ईश्वर प्रदत उपहार….

हमारे उम्र अौर विचारों की छाया।

पर ये लफ्ज , ये बोली,

 सच्चाई का  आईना है

जिंदगी के रंग – 30

समझौता, भोलापन, भरोसा हँस पङे।

बोले हमारे साथ रहने वाले का यही हश्र होता है

पर एक बात है!

हम जिंदगी का आईना अौर दुनिया की असलियत जरुर दिखा देतें हैं।

आईना

 

आईना भी इस नासमझी पर

खुद से माफी नहीं मागँने देता।

कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?

जमाना बैठा है इस काम के लिये।

हर पल मुस्कराता चेहरा

बहुत  खामोशी ……

अौर

हर पल मुस्कराता चेहरा…………

कभी गौर से देखो,

गर पढ़ सको………

तब दिखेगा,

यह तो  दर्द का आईना है।

वक्त -कविता 

mirror

कभी तो.थोड़ा थम जा

ऐ वक्त

साँस लेने दे.

ज़रा सुस्ताने दे.

घड़ी की ये सूईया भी

भागी जा रही हैं

बिना पैरों ,

अपनी दो हाथों के सहारे.

कब मुट्ठी के रेत की

तरह तुम फिसल गये वक्त.

पता ही नहीँ चला.

वह तो आईना था.

जिसने तुम्हारी चुगली कर दी.