यह बयार

यह बयार गजब ढातीं हैं

कभी बुझती राख की चिंगारी को हवा दे

आग बना देतीं है।

दिल आ जाये तो , खेल-खेल में

जलते रौशन दीप अौ शमा  बुझ देती है

जिंदगी के रंग – 43

ज़िंदगी मुझे

आज़माने की ज़िद ना कर।

तु इतनी ख़ूबसूरत है
कि

बन गई है जुनून  मेरी।

तु वह  आग है जो

जलाती है

और सिखाती भी है।

आत्मा The soul

नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ।।२३।।

इस आत्माको शस्त्र काट नहीं सकते, आग जला नहीं सकती, जल गला नहीं सकता और वायु सूखा नहीं सकता ।

nainam chindanti shastrani nainam dahati pavakah ।
na chainam kledayanty app na sosayati marutah ।। 23।।

(Bhagwat Gita: Chapter -Two,  verse -23)

“The soul can never be cut to pieces by any weapon, nor burned by fire, nor moistened by water, nor withered by the wind.”

According to Bhagwat Gita, the Soul, or Atman has the properties that Weapons cannot pierce it, fire cannot burn it, water cannot moisten it and wind cannot dry it (Chapter 2.23).

कैक्टस Cactus

रेत पर, तपते  रेगिस्तान में

खिल आये कैक्टस

ने बिना ङरे

 चटक रंगों को बिखेरा।

किसी ख़ूबसूरत नज़्म या कविता की तरह ……

गर्म बयार अौर

आग उगलते सूरज

ने  नन्हे से कैक्टस के हौसले देख

नज़रें झुका  ली ।