आत्म प्रेरणा से अपना व्यक्तित्व निखारे #मनोविज्ञान Self-improvement by autosuggestion

Auto suggestion – A process by which an individual may train subconscious mind for self- improvement.

यह एक मनोवैज्ञानिक तकनीक है. आत्म प्रेरित सुझाव विचारों, भावनाओं और व्यवहारोँ को प्रभावित करता हैँ. किसी बात को बारबार दोहरा कर अपने व्यवहार को सुधारा जा सकता है.

अपनी कमियाँ और परेशानियाँ हम सभी को दुखी करती हैँ. हम सभी इस में बदलाव या सुधार चाह्ते हैँ और जीवन मेँ सफलता चाहतेँ हैँ. किसी आदत को बदलना हो, बीमारी को नियंत्रित करने में अक्षम महसुस करतेँ होँ, परीक्षा या साक्षात्कार में सफलता चाह्तेँ हैँ. पर आत्मविश्वास की कमी हो.

ऐसे मेँ अगर पुर्ण विश्वास से मन की चाहत निरंतर मन ही मन दोहराया जाये. या अपने आप से बार-बार कहा जाये. तब आप स्व- प्रेरित संकल्प शक्ति से अपनी कामना काफी हद तक पुर्ण कर सकतेँ हैँ और अपना व्यवहार सुधार सकते हैँ। जैसे बार-बार अपनी बुरी आदत बदलने, साकारात्मक विचार, साक्षात्कार मेँ सफल होने, की बात दोहराया जाये तब सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है.

ऐसा कैसे होता है?
हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली है. बार बार बातोँ को दोहरा कर अचेतन मन की सहायता से व्यवहार मेँ परिवर्तन सम्भव है. साकारात्मक सोच दिमाग और शरीर दोनों को प्रोत्साहित करतेँ हैँ. इच्छाशक्ति, कल्पना शक्ति तथा सकारात्मक विचार सम्मिलित रुप से काम करते हैँ. पर यह ध्यान रखना जरुरी है कि हम अवस्तविक कामना ना रखेँ और इन्हेँ लम्बे समय तक प्रयास जारी रखेँ.

 

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Source – Rekha Sahay

मनोविज्ञन#3- धर्म मेँ मनोविज्ञन का छिपा रहस्य Psychology and religion / spirituality

 

 Psychology in religion – Religion is a learned behaviour, which has a strong and positive impact on human personality, if followed properly.

धर्म बचपन से सीखा हुआ व्यवहार है. अपने अराध्य या  ईश्वर के सामने अपनी मनोकामनायेँ कहना या अपनी भूल  कबुलना, ये  हमारे सभी बातेँ व्यवहार को साकारात्मक रुप से प्रभावित करती हैँ. जो मनोविज्ञान का भी उद्देश्य  है.

 प्रार्थना, उपदेश, आध्यात्मिक वार्ता, ध्यान, भक्ति गीत, भजन आदि सभी गतिविधियाँ  धर्म का हिस्सा हैँ. ध्यान देँ तब पायेंगेँ , ये सभी किसी ना किसी रुप मेँ हम पर साकारात्मक असर  डालतीँ  हैँ. अगर गौर करेँ, तब पयेँगेँ ये सभी व्यवहार किसी ना किसी रुप में  मनोवैज्ञानिक

  • ये आत्म प्रेरणा या  autosuggestion देते हैँ.
  • अपनी गलतियोँ को स्वीकार करने से मन से अपराध  बोध/ गिल्ट कम होता है
  • अंतरात्मा की आवाज सुनने की सीख, अपनी गलतियोँ को समझने की प्रेरणा देता है.
  • सोने के पहले अपने दिन भर के व्यवहार की समिक्षा करने की धार्मिक शिक्षा मनोविज्ञान का  आत्म निरीक्षण या introspection है.

अध्ययनोँ से भी पता चला है – ध्यान, क्षमा, स्वीकृति, आभार, आशा और प्रेम जैसी धार्मिक परंपराएँ हमारे व्यक्तित्व पर प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक असर डलता हैं।

 

clinical reports suggest that rehabilitation services can integrate attention to spirituality in a number of ways.

(“Spirituality and religion in psychiatric rehabilitation and recovery from mental illness”- ROGER D. FALLOT Community Connections, Inc., Washington, DC, USA International Review of Psychiatry (2001), 13, 110–116)

 

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मनोविज्ञान#2 आत्म प्रेरणा से अपना व्यक्तित्व निखारे. Self-improvement by autosuggestion

Auto suggestion – A process by which an individual may train subconscious mind for self- improvement.

यह एक मनोवैज्ञानिक तकनीक है. आत्म प्रेरित सुझाव विचारों, भावनाओं और व्यवहारोँ को प्रभावित करता हैँ. किसी बात को बारबार दोहरा कर अपने व्यवहार को सुधारा जा सकता है.

अपनी कमियाँ और परेशानियाँ हम सभी को दुखी करती हैँ. हम सभी इस में बदलाव या सुधार चाह्ते हैँ और जीवन मेँ सफलता चाहतेँ हैँ. किसी आदत को बदलना हो, बीमारी को नियंत्रित करने में अक्षम महसुस करतेँ होँ, परीक्षा या साक्षात्कार में सफलता चाह्तेँ हैँ. पर आत्मविश्वास की कमी हो.

ऐसे मेँ अगर पुर्ण विश्वास से मन की चाह्त निरंतर मन हीँ मन दोहराया जाये. या अपने आप से बार-बार कहा जाये. तब आप स्व- प्रेरित संकल्प शक्ति से अपनी कामना काफी हद तक पुर्ण कर सकतेँ हैँ और अपना व्यवहार सुधार सकते हैँ। जैसे बार-बार अपनी बुरी आदत बदलने, साकारात्मक विचार, साक्षात्कार मेँ सफल होने, की बात दोहराया जाये तब सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है.

ऐसा कैसे होता है?
हमारा अवचेतन मन बहुत शक्तिशाली है. बार बार बातोँ को दोहरा कर अचेतन मन की सहायता से व्यवहार मेँ परिवर्तन सम्भव है. साकारात्मक सोच दिमाग और शरीर दोनों को प्रोत्साहित करतेँ हैँ. इच्छाशक्ति, कल्पना शक्ति तथा सकारात्मक विचार सम्मिलित रुप से काम करते हैँ. पर यह ध्यान रखना जरुरी है कि हम अवस्तविक कामना ना रखेँ और इन्हेँ लम्बे समय तक प्रयास जारी रखेँ.a s

 

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