तालीम अौर रियाज़

खुशबू ने सीखाया बिखरना,

चाँद ने खामोशी।

खुद से गुफ्तगू करना सीखाया निर्झर ने,

 ख्वाहिशों ने सीखाया सज़्दा – इबादत करना।

तनहाई, अकेलेपन  ने   फरियाद, शिकवा

पर

दुनिया के भीङ में भटकते- भटकते भूल जाते हैं सारे तालीम

शायद रियाज़ों की कमी है।

रंगों का खेल

 

वह सफेद लिबास में, सफेद गुलदस्ते सी थी,

घर वालों को चाहिये थी लाली वाली दुलहन। 

यह शादी, मैरेज अौर निकाह के बीच का फासला

प्रेम, इश्क, लव व इबादत

सब कुछ तोङ गई।

सबसे बङी इबादत – कविता

जब भी किसी ने आँखों से मदद मागीं

अौर

नादानी में,   अनदेखा किया,  वे आज भी याद हैं।

लरजते आँखों को पहचान लेना, ऐसे हाथों को

कस कर थाम लेना,

शायद सबसे बङी इबादत है !!!!