आँसूअों से नम ना हो

बड़ी बड़ी बोलती सी

काले काजल अंजे  ….

चपल चंचल ख़ंजन नयन

देख कर बस छोटी सी

कामना … ख़्वाहिश …जागी,

नयन तेरे हो या हमारे ,

आँसूअों से नम ना हो कभी .

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सङकें

धूप सेंकते मोटे अजगर सी

बल खाती ये काली अनंत

अंतहीन सड़कें

लगतीं है ज़िंदगी सी ……

ना जाने किस मोड़ पर

कौन सी ख़्वाहिश

मिल जाए .

कभी ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाए

और कभी उन्हें पूरा करने का

अरमान बोझ बढ़ाए .

वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश

वर्षा की बूँदों को लिखने की ख़्वाहिश……

आकाश के काले मेघ से टपकते

बारिश की सुरीले संगीत ने

धरती के आँचल पर लिख

अपने आप पूरी कर दी .