तालीम अौर रियाज़

खुशबू ने सीखाया बिखरना,

चाँद ने खामोशी।

खुद से गुफ्तगू करना सीखाया निर्झर ने,

 ख्वाहिशों ने सीखाया सज़्दा – इबादत करना।

तनहाई, अकेलेपन  ने   फरियाद, शिकवा

पर

दुनिया के भीङ में भटकते- भटकते भूल जाते हैं सारे तालीम

शायद रियाज़ों की कमी है।

हर पल मुस्कराता चेहरा

बहुत  खामोशी ……

अौर

हर पल मुस्कराता चेहरा…………

कभी गौर से देखो,

गर पढ़ सको………

तब दिखेगा,

यह तो  दर्द का आईना है।