जिंदगी के रंग -117

मेरे ख्याल में दिल की सच्ची अभिव्यक्ति ही सही लेखन है। यह कविता किसी ब्लॉगर द्वारा की गई सराहना का परिणाम है- Aapki kavitayein bahot hi achi lagti hai hamein!!

The secret of good writing is telling the truth. – Gordon Lish

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कुछ जिंदगी की हकीकत, कुछ सपने,

थोङी कल्पनाअों के ताने-बाने

जब शब्दों में ढल कर

अंगुलियों से टपकते हैं पन्ने पर।

तब बनती हैं कविता।

जो अंधेरा हो ना हो फिर चांद अौर बिखरी चाँदनीं दिखाती हैं।

जो लिखे शब्दों से दिल में सच्चा एहसास जगाती हैं।

ऐसे जन्म लेती हैं कविताएँ -कहानियाँ।

 

धृष्ट चाँद

पूनम का धृष्ट चाँद बिना पूछे,

बादलों के खुले वातायन से

अपनी चाँदनी को बड़े अधिकार से

सागर पर बिखेर गगन में मुस्कुरा पड़ा .

सागर की लहरों पर बिखर चाँदनी

सागर को  अपने पास बुलाने लगी.

लहरें ऊँचाइयों को छूने की कोशिश में

ज्वार बन तट पर सर पटकने लगे .

पर हमेशा की तरह यह मिलन भी

अधूरा रह गया.

थका चाँद पीला पड़ गया .

चाँदनी लुप्त हो गई .

सागर शांत हो गया .

पूर्णिमा की रात बीत चुकी थी .

पूरब से सूरज झाँकने लगा था .