बिखरती खुशबू

बिखरती खुशबू को समेटने

की चाहत देख सुगंध ने कहा –

हमारी तो फितरत हीं है बिखरना

हवा के झोंकों के साथ।

तुमने बिखर कर देखा है कभी क्या ?

इस दर्द में  भी आनंद है।

 

चाहत -कविता

गर चाहत हो, ईमानदारी हो,

कमजोर की हिफाजत में भी चीजें  महफूज रह सकती हैं

जैसे मिट्टी के गुल्लक में

 लोहे के सिक्के