ज़िंदगी के रंग – 80

हौसले जीत से नहीं बढ़ते .

परेशानियों से डरे बिना ,

उन को हराने से बढ़ते हैं .

ज़िंदगी में हमें दूसरों को हराने की नहीं

अपने आप से जीतने से आदत होनी चाहिये.

 

यह कविता किसी अपने के लिये जो दिल के बहुत करीब है।

Image courtesy – Monica

 

 

ज़िंदगी के रंग -75

कहते है – यह ज़िंदगी बुलबुला है.

पर जीवन के रंगमंच पर

ना तो इसे फूँक मार

अस्तित्व मिटाया जा सकता है

ना नियति के झोंके से

बचाया जा सकता है .

हम सब किसी और की

ऊँगलियों से बँधे,

नियंता के हाथों

की कठपुतलिया हैं.

और सब जानते – समझते भी

ज़िंदगी और मौत का रंग

अंदर तक हिला जाता है……….