जिँदगी के रंग – 48

बंद आँखें …. 

कंधे पर ले बोझ ,

जलते अौर चलते जाना जीवन नहीं !!!

दिल की धङकने 

और अपनी अंदर जल रही लौ

का दर्पण,  

खुले  पंख , 

खुशी  अौर दर्द  के साथ  जीना ….

….उङना,

ऊपर उठना सीखा देती है!!!!!

जिँदगी के रंग – 43

जिंदगी की

 यादें भी बङी बेवफा होतीं हैं,

जिन लम्हों पर कोई हक़ नहीं होता,

उन्हें हीं हक़ से याद करते रहतीं हैं,

जीवन के हर लम्हों में उन्हें

अपनेपन से 

शामिल करते रहतीं हैं।