कैद तारीखों का

दीवार पर लगे कैलेंडर पर
आज भी तारीख और साल वही है ।
ठहर गई है वह तारीख जिंदगी में भी ।
रिहा कर दो , बख्श दो तारीखों के कैद से ।
हाजिरी लगाना दर्द देता है इस मुकदमे में।

 

 

ज़िंदगी के रंग -114

दर्द ने बताया

समंदर बाहर हो या

दिल अौ आँखों के अंदर .

दोंनो खारे होते हैं.

छोटी सी जिंदगी

सुना था जिंदगी के सफ़र में,

ऐसे कई मोङ आते हैं

जहाँ  कोई ना कोई छूट जाता हैं .

यह भी सुना-

छोटी सी है जिंदगानी

उम्र दो-चार रोज़ की मेहमान है .

मौसम रोज बदलते हैं…….

पर ऐसे बिना बोले

कोई  अपना जाता है क्या ?

ज़िंदगी के रंग -110

जिंदगी रोज़ नया कुछ सिखाती है, बशर्ते हम सीखना चाहें।

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सुबह की शीतल बयार

कानों में कुछ कह रही थी …,..

उन पर भरोसा मत करो

जो दिलों को तकलीफ़ देते हों,

अपने वो हैं जो

पल भर का भी सुकून दे ,

हौसला , तस्सली दे .

ज़िंदगी के रंग -113

जब तक फूलों सी

ख़ुशबू औ नज़ाकत थी .

बेदर्दी से पेश आते रहे लोग .

अपने को काँटे सा कठोर दिखाने के बाद

हम तो नहीं बदले पर

लोग बदल गए….

कुछ सुधर से गए हैं…..

एक खामोश ख्याल

एक खामोश ख्याल आता है दिल में,
हर अोर है शोर,

प्यार- प्रेम करो सबसे।
पर लफ्ज़ों – रिश्तों में बधीं उलझी
प्यार भरी इस जिंदगी
से प्यार करना अौर
प्यार से असली…..

…….शुद्ध प्यार पाना
सरल है क्या ? 

शुभ नव वर्ष Happy New Year

टेढी -मेढी  बल खाती पगङंङी, ऊँची- नीची राहें ,

कभी फूलों  कभी कांटों के बीच,

 तीखे मोड़ भरे  जीवन का  यह  सफ़र

मीठे -खट्टे अनुभव, यादों,  

के  साथ

 एक अौर साल गुज़र  गया

कब …..कैसे ….पता हीं नहीं चला। 

कभी खुशबू, कभी आँसू  साथ निभाते रहे।

पहेली सी है  यह  जिंदगी।

अभिनंदन नये साल का !!! 

मगंलमय,  

नव वर्ष की शुभकानायें !!!!