अपने आप को

अपने आप को आईने में ढूँढा,

परछाइयों में अक्सों….

चित्रों में खोजा,

लोगों की भीड़ में ,

किसी की आँखों में खोजा,

यादों में, बातों में खोजा,

भूल गई अपने दिल में झाँकना.

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एक खामोश ख्याल

एक खामोश ख्याल आता है दिल में,
हर अोर है शोर,

प्यार- प्रेम करो सबसे।
पर लफ्ज़ों – रिश्तों में बधीं उलझी
प्यार भरी इस जिंदगी
से प्यार करना अौर
प्यार से असली…..

…….शुद्ध प्यार पाना
सरल है क्या ? 

रिश्ते

झुक कर रिश्ते निभाते-निभाते एक बात समझ आई,
कभी रुक कर सामनेवाले की नज़रें में देखना चाहिये।
उसकी सच्चाई भी परखनी चाहिये।
वरना दिल कभी माफ नहीं करेगा
आँखें बंद कर झुकने अौर भरोसा करने के लिये।

यह बयार

यह बयार गजब ढातीं हैं

कभी बुझती राख की चिंगारी को हवा दे

आग बना देतीं है।

दिल आ जाये तो , खेल-खेल में

जलते रौशन दीप अौ शमा  बुझ देती है

जिंदगी के रंग -47

चाहो जरुर अपने आप को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

किसी अौर को चाहने की

जगह हीं ना रहे दिल में।

अौर

चाहो जरुर दूसरों को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

खुद को चाहने की जगह ही ना रहे दिल में।

 

कविता की अंतिम तीन   पंक्तियाँ   सआभार ब्लॉगर मित्र  अभय  के सौजन्य से ।

आवाज़ हीं पहचान है !!

कहते तो हैंआवाज़ हीं पहचान है !!

पर क्या मिला  है कोई ?

 जो  आवाज  से आपकीखुशी या गम जान लें 

अगर  मिलें तो दिल केरीबरखना इन्हें,

बङे खास  होते हैं  ये लोग।

जिंदगी के रंग – 45

जिंदगी के रंग निराले

जो कभी खून करना चाहते थे, उन्हें खून देते देखा।

जो जान लेना चाहते थे, उन्हें जान देते देखा

जो लाखों लोगों का दिल धङकाते थे,

उन्हें एक-एक धङकन के लिये मोहताज़ होते देखा।

जिनके लिये लाखों दुआएँ मागीं , उन्हें बद्दुआ देते देखा।

दिल में जगह देनेवालों को दिल तोङते देखा।

इन सब के बाद भी जीने की जिद देखी।

    बङी अजीब पर नशीली अौ हसीन है यह दुनिया…………….