रूहानियत

स्पर्श मणि, Philosopher’s Stone, परुसवेदी या पारस पत्थर एक पहेली, एक रहस्य है। पारस पत्थर के बारे में यह मान्यता है कि इस पत्थर से स्पर्श कर लोहा सोना बन जाता है। यह काले रंग का सुगन्धित, दुर्लभ व बहुमूल्य पाषाण है।

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जैसे छू  गया पारस लोहे को,

सोना बना गया।

चाहत है,  वैसे हीं रूहानियत-आध्यात्मिक  पारस

छू जाए दिल को

स्वर्ण बना जाए.

ज़िंदगी के रंग -114

दर्द ने बताया

समंदर बाहर हो या

दिल अौ आँखों के अंदर .

दोंनो खारे होते हैं.

अपने आप को

अपने आप को आईने में ढूँढा,

परछाइयों में अक्सों….

चित्रों में खोजा,

लोगों की भीड़ में ,

किसी की आँखों में खोजा,

यादों में, बातों में खोजा,

भूल गई अपने दिल में झाँकना.

एक खामोश ख्याल

एक खामोश ख्याल आता है दिल में,
हर अोर है शोर,

प्यार- प्रेम करो सबसे।
पर लफ्ज़ों – रिश्तों में बधीं उलझी
प्यार भरी इस जिंदगी
से प्यार करना अौर
प्यार से असली…..

…….शुद्ध प्यार पाना
सरल है क्या ? 

रिश्ते

झुक कर रिश्ते निभाते-निभाते एक बात समझ आई,
कभी रुक कर सामनेवाले की नज़रें में देखना चाहिये।
उसकी सच्चाई भी परखनी चाहिये।
वरना दिल कभी माफ नहीं करेगा
आँखें बंद कर झुकने अौर भरोसा करने के लिये।

यह बयार

यह बयार गजब ढातीं हैं

कभी बुझती राख की चिंगारी को हवा दे

आग बना देतीं है।

दिल आ जाये तो , खेल-खेल में

जलते रौशन दीप अौ शमा  बुझ देती है

जिंदगी के रंग -47

चाहो जरुर अपने आप को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

किसी अौर को चाहने की

जगह हीं ना रहे दिल में।

अौर

चाहो जरुर दूसरों को ।

पर इतना भी ना चाहो कि

खुद को चाहने की जगह ही ना रहे दिल में।

 

कविता की अंतिम तीन   पंक्तियाँ   सआभार ब्लॉगर मित्र  अभय  के सौजन्य से ।