गुरु #Teacher

गुरू बिन ज्ञान न उपजै, गुरू बिन मिलै न मोष।
गुरू बिन लखै न सत्य को गुरू बिन मिटै न दोष।।
बिना गुरू के ज्ञान व मोक्ष मिलना असम्भव है। बिना गुरू के सत्य एवं असत्य, उचित और अनुचित के भेद का ज्ञान नहीं होता फिर मोक्ष कैसे प्राप्त होगा? गुरूशरण ही सच्ची राह दिखाता है।
–कबीर

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Can teachers today be called “the untalented leftovers”? Give reasons.  Eidition 280  

ना जाने कितने मनीषियों अौ’ कबीर ने कहा- 

“गुरू गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय।
बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो बताय।।”

गुरू और  भगवान एक साथ हों तो किसे नमन करुँ?

– गुरू को अथवा गोबिन्द को?

ऐसी स्थिति में गुरू के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है

जिनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द दर्शन का सौभाग्य मिला।

गुरु वह है जो ज्ञान दे –

 मार्गदर्शन कर, अज्ञानता, अंधकार को भगाने वाला गुरु वंदनीय है।

प्राचीन परम्परा अनुसार गुरु मार्गदर्शक बन राह दिखाते थे।

नानक देव, त्रेलंग स्वामी, रामकृष्ण परमहंस, महर्षि रमण, स्वामी समर्थ, द्रोणाचार्य…….

पारस मणी से गुरूअों के स्पर्श से  आज भी लोहा, सोने बनते  देखा है।

किन्तु 

आज गुरु नियुक्त होते हैं, उनकी योग्यता के आधारानुसार

यह तो है चयनकर्ता अौर व्यवस्था की देन ।

कौन गुरु बने या ना बने।

योग्य हैं या ……