बस हम ही हम हों …..

रोहिंग्या  इस्लाम को मानने वाले  म्यांमार के अराकान प्रांत में रहने वाले लोग हैं।

The Rohingya people,  historically also termed Arakanese Indians  are a stateless,  Indo-Aryan people from Rakhine State, Myanmar.

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Rohingya

Rohinyang  India

 

दुनिया में बस हम ही हम हों …..

ये कैसी सोंच  है ??

कुछ कारण नहीँ समझ आता इसका .

धरती गगन ने ढेरों रंग दिये .

ईश्वर ने भी नहीँ सोचा – एक ही रंग में हो दुनिया.

फ़िर हम में इतनी निर्दयता -असहनशीलता क्यों ?

धर्म , रंग, भाषा , जाति …….के नाम पर ?

किसी को ख़त्म कर भी दिया तो क्या मिलेगा ?

किसने सही किया ?

ईश्वर ने विविधता दे कर या

मानव ने अपनी क्रूरता दिखा कर …..??

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मनोविज्ञन#3- धर्म मेँ मनोविज्ञन का छिपा रहस्य Psychology and religion / spirituality

 

 Psychology in religion – Religion is a learned behaviour, which has a strong and positive impact on human personality, if followed properly.

धर्म बचपन से सीखा हुआ व्यवहार है. अपने अराध्य या  ईश्वर के सामने अपनी मनोकामनायेँ कहना या अपनी भूल  कबुलना, ये  हमारे सभी बातेँ व्यवहार को साकारात्मक रुप से प्रभावित करती हैँ. जो मनोविज्ञान का भी उद्देश्य  है.

 प्रार्थना, उपदेश, आध्यात्मिक वार्ता, ध्यान, भक्ति गीत, भजन आदि सभी गतिविधियाँ  धर्म का हिस्सा हैँ. ध्यान देँ तब पायेंगेँ , ये सभी किसी ना किसी रुप मेँ हम पर साकारात्मक असर  डालतीँ  हैँ. अगर गौर करेँ, तब पयेँगेँ ये सभी व्यवहार किसी ना किसी रुप में  मनोवैज्ञानिक

  • ये आत्म प्रेरणा या  autosuggestion देते हैँ.
  • अपनी गलतियोँ को स्वीकार करने से मन से अपराध  बोध/ गिल्ट कम होता है
  • अंतरात्मा की आवाज सुनने की सीख, अपनी गलतियोँ को समझने की प्रेरणा देता है.
  • सोने के पहले अपने दिन भर के व्यवहार की समिक्षा करने की धार्मिक शिक्षा मनोविज्ञान का  आत्म निरीक्षण या introspection है.

अध्ययनोँ से भी पता चला है – ध्यान, क्षमा, स्वीकृति, आभार, आशा और प्रेम जैसी धार्मिक परंपराएँ हमारे व्यक्तित्व पर प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक असर डलता हैं।

 

clinical reports suggest that rehabilitation services can integrate attention to spirituality in a number of ways.

(“Spirituality and religion in psychiatric rehabilitation and recovery from mental illness”- ROGER D. FALLOT Community Connections, Inc., Washington, DC, USA International Review of Psychiatry (2001), 13, 110–116)

 

image from internet.