दोस्ती…मैत्री….

घंटो बातें करो

या फिर बिलकुल बातें ना हो ,

दोस्ती या सम्बन्धों को,

निभाने का यह तरीक़ा

कुछ समझ नहीं आता .

क्या कोई बता सकता है ?

क्यों करते हैं लोग ऐसा ?

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खूबसूरती  से निभाना

रिश्ते बनाने, रूलाने, झुकाने या भँजाने के लिये नहीं

निश्छलता अौर खूबसूरती  से निभाने के लिये होते हैं !