पगडंडियाँ

जीवन पथ की पगडंडियाँ ,

कच्ची पक्की राहें

कभी चमकती जगमगाती बिजली ,

कही दीप,

कहीं जुगनुओं की रोशनी में

ज़िंदगी बड़ी आगे निकल आई .

पीछे पलट कर देखने पर

ढेरों स्मृतियाँ घेर कर बैठ जाती है .

काश वापस भी जाने की भी राहें होतीं..

 

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इन इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

इन दुनियावी  रंगों , इत्रों, खुशबू, सुगंध से परे

कोई अौर भी राग-रंग,  महक है ,

जो  दिल और आत्मा को रंगती हैं

जीवन यात्रा में।

यह  खुशबू   हमें ले कर  चलती रहती है,

प्यार भरे जीवन के अनन्त  पथ पर।