तन्हाई से मुलाकात

तन्हाई से मुलाकात हुई,

उसने अपनी भीगी पलकों को खोली,

…..बोली

मैं भी अकेली …..

क्या हम साथ  समय

बिता सकते हैं?

हम नें कहा – हाँ जरुर …..

अकेलेपन अौर पीङा से

गुजर कर हीं कला निखरती है।

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Life  is a journey not a destination !!!!

 

जीवन  एक यात्रा है,

मंजिल नहीं।

 इस  यात्रा में खुशियाँ   ….बाधाएं…  आती जाती हैं।

यही  जिंदगी हैं।

    इस  लेखन यात्रा  में 

कभी मन की पीङा, कभी खुशियाँ

 आप सबों से बाँटतें बाँटतें  

 तीन साल गुजर गये …. पता हीं नहीं चला।

  आज यह ब्लॉग और मेरे ब्लॉगर मित्र

मेरे  लिये  खजाना  – अनमोल  निधि हैं।

इत्रे गुलाब

मुट्ठी में दबे,

मसले – कुचले गुलाबों 

की खुशबू फ़िजा में तैर गई।

हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क

से भर गईं

क्या हम ऐसे बन सकते हैं? 

मर्म पर लगी चोट 

पीङा नहीं सुगंध  दे ???