रिश्ते

झुक कर रिश्ते निभाते-निभाते एक बात समझ आई,
कभी रुक कर सामनेवाले की नज़रें में देखना चाहिये।
उसकी सच्चाई भी परखनी चाहिये।
वरना दिल कभी माफ नहीं करेगा
आँखें बंद कर झुकने अौर भरोसा करने के लिये।

लेखक ब्लॉक

 लेखन के दौरान कभी-कभी  लिखना कठिन हो जाता है। समझ नहीं आता क्या लिखें, कैसे लिखें।

यह तब होता है

जब आपके काल्पनिक दोस्त ,चरित्र या  पात्र आपसे बात करना बंद कर देते हैं !!!  

इसे हीं लेखक ब्लॉक कहते हैं। 

जिंदगी थी खुली किताब

जिंदगी थी खुली किताब,

हवा के झोकों से फङफङाती ।

आज खोजने पर भी खो गये

पन्ने वापस नहीं मिलते।

शायद इसलिये लोग कहते थे-

लिफाफे में बंद कर लो अपनी तमाम जिन्दगी,

खुली किताबों के अक्सर पन्नें उड़ जाया करते है ।