दोस्ती…मैत्री….

घंटो बातें करो

या फिर बिलकुल बातें ना हो ,

दोस्ती या सम्बन्धों को,

निभाने का यह तरीक़ा

कुछ समझ नहीं आता .

क्या कोई बता सकता है ?

क्यों करते हैं लोग ऐसा ?

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नज़रें उठाना और गिराना

ढेरों बातें और यादें बटोरे

गिले-शिकवे की पोटलियाँ समेटे

इंतज़ार में,  राहों में पलके बिछाये बैठे थे …..

उनका आना, नज़रें उठाना और गिराना

सारे ल़फ्ज ….अल्‍फाज़ चुरा ले गया।

शब्द अौर लफ्ज़

दिल से निकले

शब्द, लफ्ज़,  बातें वो  जादू कर सकते हैं,

जो शायद विधाता रचित

सुंदरतम चेहरा नहीं कर सकता।

दिल – कविता

कुछ लोग बड़ी बड़ी 

बातें करते हैं.

पर किसी का “दिल न दुखाना”,

सीखने में बड़ा वक्त 

लगा देते हैं.

और 

जब अपने पर आता हैं ,

तब उन्हें , अपना  दुख ही सबसे 

बड़ा  नज़र आता हैं.

इस लिये , कहते हैं……

किसी का दिल ना दुखाना

 

 

दिल १