समय मौन है !

समय गूंगा नहीं

बस मौन है,

वक्त , वक्त पर बताता है,

किसका वक्त है

अौर 

किसका कौन है!

 

 

Unknown

अँधेरा

समय  चक्र चलता रहता है,

अँधेरा …. अौर फिर उजाला….

कहते हैं –

अँधेरे को उजाला हराता है।

पर अक्सर लगता है –

रात के अँधेरे अनोखे….  अद्भुत…… विचार देते हैं।

शायद

मौन अंधेरा आँखों

की ताकत भी दिलो दिमाग में भर देता है।

शायद

स्वयं को देखने अौर आत्म मंथन

के हालात बना नवल -नये विचारों को जगाता है।

मौन अौर चीखें

 

कभी लगता है हम शब्दों से परे हैं।

हम मौन में जीते हैं।

पर फिर लगता है,

कुछ कानों तक

हवा में घुली चीखें भी  नहीं पँहुचती

फिर  मौन की आवाज़

सुनने का अवकाश किसे है????

मौन अौर समय

सुनाने वालों की बातें

सुन कर

मौन को बोलने दो।

क्योंकि सही जवाब तो

समय देता है।

गूंज


हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर  मौन  के बीच  रहते हैं

हमारे अपने विचारों  से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।

 

 

Image from internet.

मौन

 

मौन  को चुप्पी ना समझें,  बहुत कुछ छुपा होता है इसके अंदर,  इसे समझ सकतें हैं

इसकी रहस्यमय गहराई तक  झाँक कर,  क्योंकि मौन की भाषा में शब्द नहीं होते  ।।

मौन (कविता)

ना काग़ज़ ना कलम,
एक आवाज़
लेखनी बन जाती है।
बस सुनने के लिये,
इन कानों को बंद कर
सुनना होता है ……
मौन हो, अंतरात्मा की आवाज।

Source: मौन (कविता)

 

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