बदलाव

उम्र ने बहुत कुछ बदला –

जीवन, अरमान, राहें…….

समय – वक़्त ने भी कसर नहीं छोड़ी –

मौसम बदले, लोग बदले………

मन में यह ख़्याल आता है –

इतना ख़्याल ना करें, इतना याद ना करें किसी को …..

पर आँखे बंद करते –

मन बदल जाता है, ईमान बदल जाते हैं .

 

 

 

 

ज़िंदगी के रंग – 44

आज

क्या कुछ ख़ास बात है ?

नज़ारे ख़ूबसूरत लग रहे है,

लोग प्यारे लग रहे है,

मौसम ख़ुशगवार सा है

लगता है ……

शायद आज दिल ख़ुश है।

जिंदगी थी खुली किताब

जिंदगी थी खुली किताब,

हवा के झोकों से फङफङाती ।

आज खोजने पर भी खो गये

पन्ने वापस नहीं मिलते।

शायद इसलिये लोग कहते थे-

लिफाफे में बंद कर लो अपनी तमाम जिन्दगी,

खुली किताबों के अक्सर पन्नें उड़ जाया करते है ।

अोस नहीं अश्क

गगन से झुक कर पूछा चाँद ने

क्यों आँसू बहा रहे हो?

सामना करो कठिनाईयों का

किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे  अश्रुयों की । 

लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।

क्योकिं

जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं

वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।

जीने की कला   Art of living 

सम्बन्धों को बनाये रखना ,

 ईमानदारी से रिश्ते निभाये रखना ,

जीवन जीने की कला है। 

वरना …..

टूटते रिश्ते , बिखरते लोगों को देखा है ,

आसमान के आँसुओं को ओस  बन कर टपकते देखा है ।

लोग

 

लोगों को पढ़ते- पढ़ते

यह समझ आया

कुछ लोग बदलते नहीं हैं
बस
बेपर्द हो जाते हैं……..