अँधेरा

समय  चक्र चलता रहता है,

अँधेरा …. अौर फिर उजाला….

कहते हैं –

अँधेरे को उजाला हराता है।

पर अक्सर लगता है –

रात के अँधेरे अनोखे….  अद्भुत…… विचार देते हैं।

शायद

मौन अंधेरा आँखों

की ताकत भी दिलो दिमाग में भर देता है।

शायद

स्वयं को देखने अौर आत्म मंथन

के हालात बना नवल -नये विचारों को जगाता है।

पूजा स्थल

ईश्वर-नियन्ता पत्थरों की मुर्तियोँ में नहीं बसते।

हमारे विचारों मे बसते हैं।

अौर मन-आत्मा-दिल

वह मंदिर- मस्जिद -चर्च

वह पूजा स्थल हैं….

जहाँ ये विचार उपजते हैं।

शब्द, विचार अौर सपने

ना जाने कितने शब्द अौर विचार 

जेहन में आते जाते रहते हैं ।

कुछ को पन्नों पर ऊतार  दिया

अौर कुछ खो जाते है।

 सोते या अर्ध निंद्रा में  भी

कई विचार अाते जाते रहते है।

पकङ लिया तो अपने हैं

वरना सपने हैं। 

चेहरा

चेहरा क्या है?

ईश्वर प्रदत उपहार….

हमारे उम्र अौर विचारों की छाया।

पर ये लफ्ज , ये बोली,

 सच्चाई का  आईना है

जुनून अौर जोश

अपने  विचारों को

पढ़ने अौर पकङने के जुनून अौर जोश ने

मनन करना सीखा दिया।

मन के   विचारों  

को पन्नों पर  

शब्द जाल बना कर, ऊतारना  सीखा दिया।

जीवन अौर मृत्यु

जिंदगी का अंत तो वही है,

सबसे बङा शाश्वत सत्य —

जीवन अौर फिर मृत्यु…

विचार अपने-अपने हैं,

इसे हँस कर बिताअो या रो कर………

  आँसू बहाना है या पद चिंह छोङ जाना है …

रंग-बिरंगी तितलियों से विचार

जेहन में उमङते-घुमङते विचार,

पन्नों पर शब्दों का जाल बना लिख ङालो,

तब

कविता बन जाती है………..

वरना,

ये उङ जाते हैं,

रंग-बिरंगी तितलियोँ की तरह।

शायद …. किसी अौर फूल पर !!!!