लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियाँ

मन में उठते

शोर और कोलाहल ,

हलचल , उफान ,लहरें , ज्वार भाटे

को शब्दों……

लफ़्ज़ों की बहती पंक्तियों में

पन्ने पर उतारने पर

ना आवाज़ होती है

ना शोर और

मन भी काव्य की

अपूर्व शांति में डूब जाता है …….

 

 

 

Picture Courtsey: Zatoichi.

शब्दों के घाव destroy somebody by words

तलवार अौर आघातों के

गहरे घावों को भरते देखा है।

पर ना दिखने वाले शब्दों के घावों

को ताउम्र कसकते देखा है।

शब्दों से किसी को नष्ट करना आसान है

पर कटु शब्दों के तासीर को

नष्ट करना नामुमकिन है।

 

तराशे हुए शब्द

तराशे हुए शब्दों में जीवन की कहानी

कविता-नज़म बन जाती है।

अौर फिर लय में बँध संगीत बनती है।

दिल की पीड़ा

तरंगों-लहरों के साथ बहती

ना जाने कितने दिलों को

छूने लगती है।

मौन अौर चीखें

 

कभी लगता है हम शब्दों से परे हैं।

हम मौन में जीते हैं।

पर फिर लगता है,

कुछ कानों तक

हवा में घुली चीखें भी  नहीं पँहुचती

फिर  मौन की आवाज़

सुनने का अवकाश किसे है????

शब्दों का  चोला – कविता 

Don’t ask yourself what the world needs. Ask yourself what makes you come alive and then go do that. Because what the world needs is people who have come alive.
-Howard Thurman

कब क्या लिखती हूँ , 

मुझे भी नहीँ पता.

आजाद छोड़ दिया है

अपने मन और अंतरात्मा को.

यह दुनिया ही खट्टी मीठी झलकियाँ 

दिखलाती रहती है.

मै तो बस उन्हें  शब्दों का

चोला पहना देती हूँ.

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