एक टुकड़ा ज़िंदगी का !!

विचारों, यादों के क़ैद में टुकडे टुकड़े ज़िंदगी क्या जीना ?

मन , विचार ज़िंदगी से बड़े कैसे हो सकते हैं?

ज़िंदगी है इसलिए मन है, विचार और यादें हैं.

जीवन के रंग – 115

शक और विश्वास जीवन के हिस्सें हैं.

शक ख़ुशहाल मन में भी

भय का अंधकार भर देता हैं.

विश्वास जीवन के भय भरे पलों में भी

ख़ुशियाँ और शकुन ला देता है.

बिना ग़लती की सज़ा

ना जाने क्यों कभी कभी

किसी दिन

यादें बड़ी बेदर्द हो जातीं हैं.

बार बार कर यातनाएं दे जातीं  हैं।

जब लगता है,

शायद अब सब ठीक है।

तभी ना जाने कहाँ से एक छोटी सी

सुराख़ बना, यादों की  कड़ी…….जंजीर बन जाती है।

बिना ग़लती की सज़ा दे जाती हैं.

पहेली

भविष्य टुकड़े टुकड़े बँटीं हुईं,

एक पहेली है.

जोड़ कर अनुमान

लगाने की कोशिश

में ज़िंदगी और बड़ीं

पहेली बना जाती है.

भविष्य बनाने की कोशिश के साथ ,

क्यों नहीं वर्तमान में जिया जाए ?

दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते

सिमटते जा रहे हैं,

दिल और ज़ज्बातों के रिश्ते।

सौदा करने में जो माहिर है,

बस वही कामयाब है।

Unknown

एक राह

एक राह दिख गया गुलाबों की पंखुड़ियों भरा !!

चल दिए उसपर ,

भूल कर कि गुलाबों में काटें भी होते हैं……..

काटों की कसक आज भी है.