भरे रहने का एहसास

पुराने सामानों के बीच बैठ

यादों में सब ज़िंदा रखने की …..

बीते पलों को ज़बरदस्ती

वर्तमान में लाने की ……

कोशिश

वर्तमान और भविष्य को भी,

पुराने दर्द से भर देती है .

यादों- एहसासों से ,

भरे होने के एहसास

से अच्छा है –

सब धूम्र ग़ुबार में विलीन कर देना…….

आकाश में उठते धुएँ

के साथ सूनी पसरी पीड़ा

शून्य में शून्य होते देखना …….

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ज़िद

चाहतों से और ,

चाहते रहने से ,

ना मुक़ाम मिलते है .

ना चाहतें पूरी होती है .

मंज़िल माक़ूल पाने के लिए

चलते रहने की ज़िद

भी ज़रूरी है .

रंजिश

आज हीं कहीं यह पढ़ा और  सलाह कुछ अधूरी सी लगी इसलिए कुछ पंक्तियाँ जोड़ दी-

लम्हे फुर्सत के आएं तो, रंजिशें भुला देना दोस्तों,

किसी को नहीं खबर कि सांसों की मोहलत कहाँ तक है ॥

नई पंक्तियाँ

अच्छा हो रंजिशे पैदा करनेवाली आदतों को भुला देना ,

किसी को पता नहीं ये आदतें कहाँ तक चुभन पहुँचाएगी .

ना रंजिशे होंगी ना भुलाने की ज़रूरत .

ज़िंदगी और साँसों के मोहलत की गिनती की भी नहीं ज़रूरत.

अद्भुत रचनाकार

अद्भुत रचनाकार

की तुलिका के जादू से रंगे

इस कायनात …. जहाँ……दुनिया में

मदिर मादक महक …सौंदर्य ….

ख़ूबसूरत रंग भरे है ,

हम सब देखते हैं.

पर उसके रचनाकार को नहीं खोजते

और ना उसके संदेश को पढ़ते है .

ख़त

एक ज़माना था

जब किताब लेना देना

और लौटाना तो बहाना था .

ख़ुशबू में डूबे ख़तों

का यह राह पुराना था .

पर उन पैग़ामों का क्या ……

खोजने वाले पन्ने पलटे रहे

बातें अनकहे लबों और

झुकी नज़रों में छुपी रह गई .