पावर ड्रेसिंग क्या है ? Power Dressing

Dressing for Success

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1970-80  में पावर ड्रेसिंग की शुरुआत अमेरिका में हुई। जॉन टी मोलॉय ने कार्यक्षेत्र में महिलाओं के लिए ड्रेस कोड का सुझाव दिया। जिससे उन्हें भी पुरुषों के बराबर प्रभाव,  हक और सम्मान मिल सके। यहाँ से पावर ड्रेसिंग के विचार की शुरुआत हुई।

जो आज बहुत जरुरी मानी जाती है। आज पावर ड्रेसिंग एक अनूठी, नई शैली के रुप में  पुरुष अौर महिलाअों दोनों के लिये समान महत्व ले कर उभरकर सामने आयी है। क्योंकि इससे आत्मविश्वास,करियर,बॉडीलैंग्वेज,आकर्षण  प्रभावित होते हैं।

बिना शब्दों के, बिना बोले अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए सही कपड़े, ब्लेज़र, पहनावा, जूते और  साज सज्जा  आज पावर ड्रेसिंग का जरुरी हिस्सा बन चुका है। यह कार्यस्थल और अन्य जगहों पर आप के प्रभाव को बढ़ाता है और सकारात्मक असर ङालता  है।      


 


 

अपने आप से मिल कर कैसा लगा ?

The self-concept is what we think about the self (ourself); self-esteem, is the positive or negative evaluations of the self, as in how we feel about it.
Abraham Maslow states that psychological health is not possible unless the essential core of the person is fundamentally accepted, loved and respected by others and by her or his self. Self-esteem allows people to face life with more confidence, benevolence and optimism, and thus easily reach their goals and self-actualize.

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हम अपने बारे में क्या सोचते हैं और कैसा सोचते हैं सेल्फ कंसेप्ट कहते हैं। यह सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है। अब्राहम मस्लो के अनुसार हमारा मानसिक स्वास्थ्य ठीक रहने के लिए, यह जरूरी है कि हम अपने को स्वीकार करें अौर प्यार करें। इससे हम आत्मसम्मानी, आत्मविश्वासी   आशावादी  बनते हैं। सेल्फ कंसेप्ट का मजबूत होना और सकारात्मक होना अच्छी बात हैं.

कभी अपने भीतर झाँकने की कोशिश की है?

आईने में झाँको , अपने आप को ग़ौर से देखो

अपनी आँखों में , निगाहों में झाँको.

अपने अंदर झाँको, मिलो अपने आप से.

बातें करो अपने आप से .

और बताओ अगर

बिलकुल अपने जैसा कोई मिला

तब कैसा लगेगा आपको ?

मिलना चाहेंगे या नहीं उससे ?

सबसे पहले क्या कहना चाहेंगे ?

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मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार से ङरें नहीं, सामना करें !

सेल्फ काउंसिलिंग व ऑटो सजेशन से अपने मनोवैज्ञानिक स्वयं बने !!!!

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मनोवैज्ञानिक या भावनात्मक दुर्व्यवहार

मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहारों को भावनात्मक दुर्व्यवहार भी कहा जाता है। यह एक व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को परेशान करने अौर उस पर हावी होने के लिये किया जाता है, जिसके मनोवैज्ञानिक यानि मानसिक आघात – चिंता, अवसाद, तनाव हो सकता हैं। यह अक्सर ङराने, धमकाने, गैसलाइटिंग और कार्यस्थल में दुर्व्यवहार,कड़वा, दोहरे अर्थ की बातें, उलाहना, व्यंग शामिल हो सकते हैं। यह अत्याचार, अन्य हिंसा, तीव्र या लंबे समय तक किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है, जैसे नजरबंदी, झूठे आरोप, झूठे विश्वास और अत्यधिक मानहानि। कभी-कभी मीडिया द्वारा प्रतिशोध भी देखा गया है। भावनात्मक दुर्व्यवहार की परिभाषा है: “किसी भी कृत्य जिसमें अलगाव, मौखिक हमला, अपमान, धमकी, घुसपैठ, या कोई अन्य ऐसा व्यवहार शामिल हो सकता है जो पहचान, गरिमा और आत्म-मूल्य की भावना को कम कर सकता है।” मनोवैज्ञानिक दुर्व्यवहार घातक दुर्व्यवहार के रूप में जाना जाता है। शोधकर्ताओं इसे “क्रोनिक मौखिक आक्रामकता” का नाम भी दिया है। जो लोग भावनात्मक दुर्व्यवहार से पीड़ित होते हैं उनमें बहुत कम आत्मसम्मान होता है, व्यक्तित्व में बदलाव हो सकता है। वे उदास, चिंतित या आत्मघाती भी हो सकते हैं। भावनात्मक शोषण की एक सार्थक परिभाषा है – “भावनात्मक दुर्व्यवहार किसी भी तरह का दुरुपयोग है जो प्रकृति में शारीरिक होने के बजाय भावनात्मक है। इसमें मौखिक दुरुपयोग और निरंतर आलोचना से लेकर सूक्ष्म सूक्ष्मतर, छेड़छाड़, और कभी भी प्रसन्न होने देने से इंकार जैसी कुछ भी बातें शामिल हो सकती हैं। भावनात्मक दुरुपयोग कई रूप ले सकता है। अपमानजनक व्यवहार के तीन सामान्य पैटर्न में आक्रामक, इनकार करना, और कम करना शामिल है ”।

ऐसा करनेवाले के लक्षण अौर व्यवहार –

चिल्लाना, अपमान करना, मजाक उङाना, ज्यादातर पीड़ित के लिए नकारात्मक बयानों का उपयोग करना, धमकी भरी बातें और धमकी देना, उपेक्षा करना , अौर लोगों से अलग करना या अलग कारने की कोशिश करना, पीड़िता की छवि को धूमिल करने की कोशिश, अपमानजनक बातें, गलत किये गये वयवहारों से इनकार।

निवारण

एक हर जगह हो सकता है, जैसे कि – परिवार, कार्यस्थल या अंतरंग संबंध में। दुरुपयोग की पहचान रोकथाम के लिए पहला कदम है। अक्सर दुर्व्यवहार पीड़ितों के लिए ऐसे व्यवहार को पहचानना अौर स्वीकार करना मुश्किल होता है। वे पेशेवर मदद के लिए जा सकते हैं। अनेक गैर-लाभकारी संगठन NGO हैं जो एस प्रदान करते हैं घरेलू और दुर्व्यवहार के लिए सहायक और रोकथाम सेवाएं, जैसे कि पुरुषों और महिलाओं के लिए घरेलू दुर्व्यवहार हेल्पलाइन (संयुक्त राज्य अमेरिका में, घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए सूचना और संकट के हस्तक्षेप की पेशकश करने के लिए कर्मचारियों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों द्वारा संचालित है।

विदेशों में सहायता प्रदान की जाती हैं. हमारे देश में ऐसी सुविधाएं बहुत कम है। इसलिए या तो मनोवैज्ञानिकों की प्रोफेशनल सहायता लें या स्वयं ही ऑटो सजेशन या सेल्फ काउंसिलिंग द्वारा अपनी समस्या को सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं। घबराएँ नहीं, बस अपने आप को मजबूत बनाने और समझदार होने की जरूरत है।

 

Courtesy – wikipedia

Fight back Psychological abuse or Emotional abuse

Be your own Psychologist – Use Auto suggestion and self counselling !!!!!

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Psychological abuse

Psychological abuse is also called emotional abuse, is a form of abuse, characterized by a person subjecting or exposing another person to behavior that may result in psychological trauma, including anxiety, chronic depression, or post-traumatic stress disorder. It is often associated with situations of power imbalance in abusive relationships, and may include bullying, gaslighting, and abuse in the workplace. It also may be perpetrated by persons conducting torture, other violence, acute or prolonged human rights abuse, particularly without legal redress such as detention without trial, false accusations, false convictions and extreme defamation such as where perpetrated by state and media.One definition of emotional abuse is: “any act including confinement, isolation, verbal assault, humiliation, intimidation, infantilization, or any other treatment which may diminish the sense of identity, dignity, and self-worth.”1Emotional abuse is also known as psychological abuse or as “chronic verbal aggression” by researchers. People who suffer from emotional abuse tend to have very low self-esteem, show personality changes (such as becoming withdrawn) and may even become depressed, anxious or suicidal.Another meaningful definitions of emotional abuse. “Emotional abuse is any kind of abuse that is emotional rather than physical in nature. It can include anything from verbal abuse and constant criticism to more subtle tactics such as intimidation, manipulation, and refusal to ever be pleased. Emotional abuse can take many forms. Three general patterns of abusive behavior include aggressing, denying, and minimizing”

Signs and Symptoms          

blaming of the victim , abuse,  Yelling or swearing ,  insults, mocking, mostly using negative statements for the victim, Threats and intimidation, Ignoring or excluding, Isolating, trying to tarnish the image of the victim , Humiliating, Denial 

Prevention

Emotional abuse may take place  any where such as – Family, work place or In intimate relationship. Recognition of abuse is the first step to prevention. It is often difficult for abuse victims to acknowledge their situation and to seek help. They may go for professional help.

There are non-profit organizations which provide support and prevention services, such as the Domestic Abuse Helpline for Men & Women (in the USA, operated by staff and trained volunteers to offer information and crisis intervention to victims of domestic violence.

Courtesy – Wikipedia

Mesophonia – Quite Please !!

Misophonia describes having a sensitivity to certain sounds. At the same time its an indication of being intelligent.

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Misophonia may cause a reaction to sounds such as dripping water, chewing, snapping gum or repetitive noises, such as pencil tapping. People with misophonia can become irritated, enraged or even panicked when they hear their trigger sounds.

Some studies show that people with misophonia generally have strong negative feelings, thoughts, and physical reactions to specific sounds, which the literature calls “trigger sounds.

Courtesy- Wikipedia