Study of PNAS Journal

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Without watching the watch -Our body clock / Circadian Rhythm शरीर की घड़ी / सर्कैडियन लय (Noble Prize 2017)

हमारा “शरीर घड़ी” / सर्कैडियन लय हमारे  सोने, उठने, भूख लगने  और कई शारीरिक प्रक्रियाओं को बिना घङी देखे हमारे शरीर को बताता  रहता है। यह आंतरिक शरीर घड़ी पर्यावरण के संकेतों  जैसे धूप और तापमान जैसी बातों से प्रभावित हो सकता है। शोधों   से इसके  शरीर पर प्रतिकूल  प्रभावों की खोज हो रही है  जैसे हृदय संबंधी परेशानियाँ, मोटापे की संभावना, अवसाद और बाइपोलार ङिसअौङर   अादि।

फिजियोलॉजी या मेडिसिन में 2017 नोबेल पुरस्कार  अमेरिकी वैज्ञानिक जेफरी सी हॉल, माइकल रोजबाश और माइकल डब्ल्यू यंग  को “सर्कैडियन लय को नियंत्रित करने वाले आणविक तंत्र की उनकी खोज” के लिए दिया गया हैं। जो फ्लाइट जेट लैग की व्याख्या करती है।

Our “body clock” /  circadian rhythm is a cycle that tells our bodies when to sleep, rise, eat–regulating many physiological processes without watching  the watch. This internal body clock may be  affected by environmental cues, like  sunlight and temperature. When one’s circadian rhythm is disrupted, sleeping and eating patterns can be disturbed. No of researches are  examining the adverse health effects such as –  chances of cardiovascular problems, obesity, and a correlation with neurological problems like depression and bipolar disorder etc.

American scientists Jeffrey C Hall, Michael Rosbash and Michael W Young have won the 2017 Nobel Prize in Physiology or Medicine for “their discoveries of molecular mechanisms controlling the circadian rhythm”.

 

 

 

AI – Artificial Intelligence, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

Artificial Intelligence  is a way of making a computer, a computer-controlled robot, or a software think intelligently, in the similar manner the intelligent humans think.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्या है ?  इस ब्रम्हांड में सबसे जटिल चीज है हमारा दिमाग।  क्योंकि  सबसे जटिल नेटवर्क या सबसे ताकतवर सिस्टम भी उस की बराबरी नहीं कर सकता। इसी की तरह, ऐसी हीं मशीन बनाने की कोशिश है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अंतिम लक्ष्य । दूसरी भाषा में कहें तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एक ऐसा कंप्यूटरकृत दिमाग बनाना है  जो किसी इंसान की तरह सोच सकता है । उसकी तरह नई बातें सीख सकता है। अगर ऐसा होता है तब यह दुनिया हमेशा के लिए बदल जाएगी।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भय क्या है ? कुछ लोगों के अनुसार यह खतरा भी हो सकता है । क्योंकि एआई  में किसी भी इंसान की तुलना में अधिक बुद्धिमान बनने की क्षमता होगी,  मानव ने अभी तक  ऐसी कोई चीज नहीं बनाई है जिसकी  बौद्धिक क्षमता  मनुष्यों से ज्यादा हो अौर हमारे पास भविष्यवाणी करने का कोई निश्चित तरीका नहीं है कि यह कैसे व्यवहार करेगा।

कुछ लोगों का विचार है कि हम जैविक और कृत्रिम बुद्धि का विलय निकट भविष्य में देखेंगे।

Face Situations in Contemporary Japan (A Qualitative Research)

PSYCHOLOGY
Face Situations in Contemporary Japan (A Qualitative Research)
by mathias sager • March 10, 2017 •
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Abstract

Self-esteem seems to play a significant role in one’s quality of life. A key factor positively influencing self-esteem is the possibility to freely choose one’s relationships. Japanese tend to report comparatively low self-esteem levels, what may be due to modesty considerations though too. The prevalent East Asian concept of ‘face’ reflects one’s evaluation of how the self is seen by others, while the concept of self-esteem represents the own notion of the self. This article did qualitatively investigate what current and emerging situations in Japan are that require (new) responses from Japanese to maintain their face and to positively cultivate self-esteem. The interviews conducted revealed that losing face seems to involve a shame creating publication of a person’s inadequacy to meet social expectations that are formally or informally agreed respectively ingrained in the culture. Participants expressed some difficulties even for Japanese to interpret what in a particular relationship would be considered common sense and what adequate communication styles are. Social status and seniority are increasing one’s face value. Such value can be lent to others in the form of shared reputation and trust. The concept of face, rather than about self-esteem, seems to be about the maintenance or increase of social relational value. In conclusion, the learning and application of well adaptive communication and coping styles are required to successfully manage mixed low and high contexts in changing private and workplace situations in Japan.

Source: Face Situations in Contemporary Japan (A Qualitative Research)

पालक पत्ता से धड़कता मानव हृदय ऊतक Spinach Leaf Transformed Into Beating Human Heart Tissue

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Left: A decellularized spinach leaf is pictured before dye is added to test its ability to filter blood through tissue.Right: Picture of a spinach leaf after it successfully demonstrated red dye could be pumped through its veins, simulating the blood, oxygen and nutrients human heart tissue needs to grow.

Using the plant like scaffolding, scientists built a mini version of a working heart, which may one day aid in tissue regeneration.

 

  वैज्ञानिकों ने पालक पत्ता से धड़कता मानव हृदय ऊतक बनाया । काम करते   दिल का एक मिनी संस्करण है, जो हो सकता है यह एक दिन  ऊतक पुनर्जनन बनाने में  सहायता हो ।

Images courtesy – PHOTOGRAPH COURTESY WORCESTER POLYTECHNIC INSTITUTE ,

and interne.

News -http://news.nationalgeographic.com/2017/03/human-heart-spinach-leaf-medicine-science/

ईश्वर की खोज में 1-कविता In search of GOD-Poem

Where can we go to find God if we cannot see Him in our own hearts and in every living being.

Swami Vivekananda

NEWS,   27/03/2017

1. Tamil Nadu Youth Hacked To Death For Being Atheist,

2. Wanted to attack UP dargah, Imambara and cleric before Ujjain blast, accused tells NIA.

3.22/3 London attack.

And countless other such news…………….

धर्म ना मानो तो मुश्किल,

मेरा धर्म न मानो तो भी मुश्किल,

पता नहीं गीता, रामायण, कुरान, बाइबल..

किसने कहा  भगवान अलग-अलग हैं?

लेकिन  लगता है हम उन्हें अलग करके ही मानेंगे!

क्या हम इस सीमा से आगे यह नहीं सोंच सकते हैं कि

हम इंसान हैं.

image courtesy  internet.

मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #2

WHO and various institutions have found negative effect of excessive use of mobile on our health.

मोबाईल के छुट्टी माँगने के भयंकर सपने से जागते ही मैंने उसे अपने कलेजे से लगा लिया. अब वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहता. शर्ट के ऊपर के पाकेट में उसका आशियाना बन गया.

इतने पर भी मेरे दिल को तसल्ली नहीँ हुई. मोबाईल के छुट्टी पर जाने की कल्पना से अक्सर दिल डर से धड़कने लगता. लोगों ने कहा धडकी की बीमारी हो गई हैं मुझे. बड़ा टोना टोटका चला. किसी ने हौलदिल पहनने कहा. मैं सीधे डॉक्टर के पास पहुँचा.

दिल का हाल अच्छा नहीँ था. मुझे सख्त आराम का निर्देश देते हुये मेरी दुनिया और मोबाईल से मुझे अलग कर, अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

वहाँ सचमुच मुझे बड़ी शान्ति और सुकून मिला. ना बार बार की घंटी की आवाज़ ना उसे चार्ज करने का तनाव.

घर वापस आ कर बार बार बजती मोबाईल मुझे बड़ी नागवार गुजरी. तभी मेरे मोबाईल ने बड़े व्यंग से पूछा – क्यों , अब समझ आया ? क्यों मैं छुट्टी माँग रहा था? या फिर से अस्पताल जाने और डाक्टर को पैसे देने की मर्जी हैं ?

(हौलदिल – संग यशब नाम के चौकौर पत्थर के टुकडे पर कुरान की एक विशेष आयत खुदी रहती हैं. इसे रोगोंबाधा दूर करने के लिये पहना जाता हैं.)

 

image from internet

 

Posted on July 13, 2016 •Edit \”मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire)

Source: मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone  -satire) #2