कैसे तय करे कि हम वोट किसे दें?

व्यंग Satire

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चुनाव का मौसम आते राजनीति

गलियरों में एक खेल ज़ोरों पर है।

एक दूसरे पर ताने कसते, व्यंग,

टीकाटिप्पणी करते…..

धर्म, पार्टी, राजनीतिक आधार पर

तंज कसते, छिंटाकशी करते बड़े लोगों का खेल.

जो बच्चों जैसे लग रहे हैं.

जनता भी बिना सोचे समझे

इस खेल को खेलने लगी है.

अब इंतज़ार यह है कि ये लोग कब बड़े होंगे .

तब तो हम,

तय करेगे किहम वोट किसे दें !!!!

कुर्बानी-व्यंग, Staire

Charity begins at home…….????

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शाश्वत रूप से अनुत्तरित एक प्रश्न हैजान की कीमत इतनी कम क्यों ?

पर अब एक नया प्रश्न हैजान की कीमत है भी या नहीं ?

और करनी है प्रिय वस्तु की कुर्बानी तब

अपनी जान अनमोल है ना ?

होगा वरना स्वार्थ पूर्ण।

सबसे मार्मिक स्थिति है उस बच्चे की है,

जो अपने घर में अपनों के साथ सुरक्षित नहीं महसूस कर रहा हो

ना जाने कब क्या हो जाए ?

Bihar Man Seeks Permission for Human Sacrifice, Says Son Will be First -Residents of the village say Singh is known as “Pagla baba” (crazy godman) because of his wayward behaviour which includes often walking around naked or carrying a human skull in his hand.

courtesy- Inserts & News 18.

हद हो गई – व्यंग

corruption Unlimited

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Old satire  & English news- Rats drank it’: Cops as 1,000 litres of seized liquor disappears from police station चूहों का स्ट्राइक – व्यंग

मालखाने के शराब पीने के कलंक से आहत ,

चूहों में राहत की लहर दौड़ गई है.

लम्बी स्ट्राइक के बाद सच्चाई सामने आता देख ,

शराब की लापता बोतलेंपुलिस वालों के पास पा

चूहों ने ली चैन की साँस और नारा लगते देखे गए –

चूहे शराब नहीं पीते !!!!!

Latest news in English – Huge liquor stock seized from SHO’s residence in dry Bihar, entire police station staff replaced

चुनाव -व्यंग

Aim of Election – Elections enable voters to select leaders and to hold them accountable for their performance in office. … As a result, elections help to facilitate social and political integration. Finally, elections serve a self-actualizing purpose by confirming the worth and dignity of individual citizens as human beings.

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चुनाव क्या गज़ब का खेल है?
वैसे तो मालुम नहीं ये भगवान को कितना याद करते हैं ?पर हर पाँच साल पर धर्म, मंदिर-मस्जिद मुद्दा याद कराते हैं।

झगङे बढ़ जाते हैं, मामला वहीं का वहीं रह जाता है।

वैसे तो नहीं पता ये इंसानियत को कितना याद करते हैं?

पर हर पाँच साल पर रिजर्वेशन-आरक्षण का खेल खेलाते हैं।

कभी भारत- पाक भँजाते हैं।

छींटाकशी, टीका-टिप्पणी, आरोप- प्रत्यारोप, एक दूसरे की टाँग खिचाईं में मस्त,

अँग्रेज ‘ङिवाइङ ऐंङ रुल’ का गुरुमंत्र दे गये।

बरसों बीते, अरसे बीते …………

मुद्दा वही पुराना हिट है।

मजे की बात है पक्षी आज भी जाल में फँस जाते हैं,

काश कुछ ऐसे मुद्दे होते –

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, देश के उज्जवल भविष्य की बातें,

हमें यह लगता – अरे ! इस बार हम छले नहीं गये।

सम्बंध बराबरी वालों में- व्यंग

सुप्रसिद्ध हस्तियों की तरह, जुर्म करने वालों की ऐसी खबरों को क्या महत्व दिया जाना चाहिये?

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सब जानते हैं कि

शादी ब्याह बराबरी वालों में होता है .

फिर क्या हम नासमझ है?

आप कुंडली मिलाते हो ,

रिश्ता करने से पहले .

हमने भी क्रेडेंशियल मिलाया है .

दोनों परिवार को जुर्म के क्षेत्र में एक सा पाया।

तब ऐसा सम्बंध बनाया है .

तब तो समाचार बन नाम कमाया है .

 

 

English news in detail  –All in the ‘family’: Yakub Memon’s daughter weds 1993 Mumbai blasts accused Aziz Bilakhia’s son

मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire) #2

WHO and various institutions have found negative effect of excessive use of mobile on our health.

मोबाईल के छुट्टी माँगने के भयंकर सपने से जागते ही मैंने उसे अपने कलेजे से लगा लिया. अब वह हमेशा मेरे दिल के करीब रहता. शर्ट के ऊपर के पाकेट में उसका आशियाना बन गया.

इतने पर भी मेरे दिल को तसल्ली नहीँ हुई. मोबाईल के छुट्टी पर जाने की कल्पना से अक्सर दिल डर से धड़कने लगता. लोगों ने कहा धडकी की बीमारी हो गई हैं मुझे. बड़ा टोना टोटका चला. किसी ने हौलदिल पहनने कहा. मैं सीधे डॉक्टर के पास पहुँचा.

दिल का हाल अच्छा नहीँ था. मुझे सख्त आराम का निर्देश देते हुये मेरी दुनिया और मोबाईल से मुझे अलग कर, अस्पताल में भर्ती कर दिया गया.

वहाँ सचमुच मुझे बड़ी शान्ति और सुकून मिला. ना बार बार की घंटी की आवाज़ ना उसे चार्ज करने का तनाव.

घर वापस आ कर बार बार बजती मोबाईल मुझे बड़ी नागवार गुजरी. तभी मेरे मोबाईल ने बड़े व्यंग से पूछा – क्यों , अब समझ आया ? क्यों मैं छुट्टी माँग रहा था? या फिर से अस्पताल जाने और डाक्टर को पैसे देने की मर्जी हैं ?

(हौलदिल – संग यशब नाम के चौकौर पत्थर के टुकडे पर कुरान की एक विशेष आयत खुदी रहती हैं. इसे रोगोंबाधा दूर करने के लिये पहना जाता हैं.)

 

image from internet

 

Posted on July 13, 2016 •Edit \”मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone -satire)

Source: मोबाईल फोन छुट्टी दिवस -व्यंग (Holiday for mobile phone  -satire) #2

मैगी को एक प्रेमपत्र ( व्यंग )

मेरी प्यारी मैगी,

                      प्यार 

                     मेरे जिंदगी तुम्ही से शुरू हुई। पर तुम्हारे साथ खत्म हो, यह नहीं कह सकता। जाने वाले के साथ तो कोई नहीं जाता है न। पर मैं तुमसे इतना जरूर कहना चाहता हूँ कि तुम्हें मैं भूल नहीं पाता हूँ। मेरा तुम्हारा बचपन का प्यार है। मेरी माँ ने मेरा परिचय तुमसे करवाया था। पूरे परिवार और समाज को हमारा प्यार मंजूर था। पर आज वही दुनिया कठोर बन कर हमारे बीच आ गई है।

मुझे आज भी तुम्हारी खूबसूरती याद है। गोरी, बल खाती काया ऊपर से तुम्हारी दो मिनट की फुर्ती। कुछ भी भूल नही पाता हूँ। घर से हॉस्टल जाने पर भी हमारा प्यार कम नहीं हुआ था। कितनी रातें तुम्हारी याद आने पर, वार्डेन से छुप कर, आयरन उल्टा कर उसे हॉट प्लेट बना तुम्हारे लिए पानी उबालता था।

आज तक तुम जैसी कोई मेरी जिंदगी में आई नहीं। पर लगता है यह बेदर्द समाज मेरी जिंदगी में तुम्हारी सौत को लाने की तैयारी में हैं। आज ना कल तुम्हारे जैसी कोई ना कोई हमारे जीवन में आ जाएगी।

आज एक सच्ची बात तुम्हारे सामने कबूल करने जा रहा हूँ। तुम मुझे बड़ी पसंद थी पर ठंड़ी होने पर बड़ी मोटी, भद्दी हो जाती थी। तुम्हारा यह बदसूरत रूप हमारे स्कूल शिक्षिका ने बहुत बार हमें दिखाने की कोशिश की, तुम्हारी ढ़ेरो बुराईयाँ भी की। पर तुम तो जानती हो प्यार अंधा होता है।

तुम्हारा पुराना चाहने वाला

भोजन भट्ट